Srimad Bhagwat Ashtavkra Geeta
अष्टावक्र गीता -जीवात्मा ,आत्मा,औए परमात्मा का स्वरूपअष्टावक्र गीता -जीवात्मा ,आत्मा,औए परमात्मा का स्वरूप
श्लोक-प्रकृत्या शून्यचितोय: प्रमादाद भावभावन: |निद्रितो बोधित इव क्षीण -संस्मरणों हि स: ||१|| सामान्य अर्थ- जो स्वभाव से ही शून्यचित है,वह लीला से संसार के होने {...}
